सांवरी वूमेंस एम्पावरमेंट । सेमिनार की कुछ एक झलक

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सांवरी वूमेंस एम्पावरमेंट के तरफ से दिनांक २० मार्च २०१५ को ली पेसिफिक Banquet हाल में सेमिनार का आयोजन किया गया । सांवरी वूमेंस एम्पावरमेंट ने विगत कई वर्षों से नारी उत्थान तथा महिला वर्ग में एक अद्वितीय जागरूकता लाने … Continue reading

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राष्ट्र में उच्चशिक्षित लोग उसके एक सम्पदा के तरह होते है


विगत कई वर्षों से नक़ल [ अंग्रेजी में कॉपी ] का उल्लेख यदा कदा समाचार पत्रों, टेलीविजन के माध्यम से मिलता रहा है और आज कल तो यह चलन ही हो पड़ा है। चाहे वो मैट्रिक की परीक्षा हो या MBBS प्रवेश की या तो रेलवे भर्ती की यानि यूँ कहें की शिक्षा जगत से शुरू होकर जीवन के हर पड़ाव पर नक़ल की जरुरत।

हमारे देश को आजाद होने के बाद भी मैकाले की शिक्षा व्यवस्था ने हमें शैक्षिक रूप से आजाद नहीं होने दिया इसका परिणाम हम सबके सामने है। आज अभिवावक अपने पाल्य को नक़ल कराने में अपना अभिमान समझने लगा है तो राजनेता इसके ऊपर तीखे व्यंग्य करने से गुरेज तक नहीं करते।cheating in Examination

शायद मैं नहीं समझ पा रही कहाँ जा रहे है हम। नक़ल का चलन भावी पीढ़ी को या तो जाहिल बनाएगा और अगर कोई कुछ कर भी गया तो निःसन्देह अकुशल होगा और मैकाले पूर्णतया सफल होगा । अगर हम सभी चाहे तो हमें पूर्ण विश्वाश है कि इससे मुक्ति पायी जा सकती है क्योंकि ये कोई समस्या नहीं है यह पूर्ण रूपेण से एक अपाहिज व्यवस्था का लक्षण है और इसके परिणाम भी भयावह है क्योंकि अकुशल डॉक्टर, अभियंता, अध्यापक आदि लोग जो भी कार्य करेंगे चाहे वो किसी भी क्षेत्र से हों वहां भी नक़ल का प्रयोग करेंगे फलस्वरूप गुणवत्ता का हश्र क्या होगा ? ? ? यह एक चिंतनीय विषय है ।
आज हर एक अभिवावक अपने बच्चों को पब्लिक स्कूल / निजी विद्यालय में भेजना चाहता है और निजी विद्यालय की तादात विगत १० वर्षो में चौगुनी से भी ज्यादे हो गई होगी और राजकीय विद्यालय पूर्ण रूपेण से बिना किसी रोक टोक के अवनति के राह पर अग्रसर है। अच्छी शिक्षा अभिवावक के लिए चुनौती बन गई है । और निजी विद्यालय होटल की तरह दिख रहे है, उन अभिवावक के जीतोड़ कमाई पर ? क्या ऐसे ही देश की परिकल्पना की गई होगी जहाँ हर चीज बिकाऊ हो।

किसी भी राष्ट्र में उच्चशिक्षित लोग उसके एक सम्पदा के तरह होते है चाहे वो व्यवसाय जगत हो या विज्ञान, कला, राजनीति, चिकित्सा आदि परन्तु जिस प्रकार से दिन दूना रात चौगुना इसका नुकसान हो रहा है यह एक विचारणीय प्रश्न है समाज के लिए सरकार के लिए, येन केन प्रकारेण इसपे नियंत्रण तथा एक गुढ़ चिंतन की आवश्यकता है और पुनः सविनय निवेदन है उन अभिवावक गण से कि एक बार सोचें क्योंकि पाल्य की छोटी गलतियां/ अच्छाइयाँ का बढ़ावा उनके भविष्य निमार्ण में कहीं न कहीं बड़ा योगदान देती हैं।

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शिक्षक नहीं, सेठ के भरोसे आज की शिक्षा


शिक्षित समाज के निर्माण में सबसे अहम भूमिका शिक्षकों की होती है, किंतु आज शिक्षक जिन हालात का सामने कर रहे हैं, यह बात बेमानी जान पड़ती है | 

उदारीकरण की आंधी के बाद हमारे देश के नीति निर्धारकों ने शिक्षक नाम की संस्था को समाज के हाशिए पर ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. आज शिक्षकों के आगे कई चुनौतियां हैं. ये चुनौतियां हमारी सरकार ने ही पैदा की हैं. शिक्षा के नाम पर उसने जो भी कदम उठाए हैं, उससे न तो शिक्षा की हालत सुधर रही है और न शिक्षकों की. हाल में सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया लेकिन इसमें शिक्षकों के लिए विशेष कुछ भी नहीं था. इसके अलावा, शिक्षा का आज इस कदर बाजारीकरण हो चुका है कि शिक्षकों की कीमत न तो पहचानने वाला कोई है और न ही शिक्षक अपने मूल्यों की रक्षा करने को लेकर पहले की तरह सचेत हैं. देश की शिक्षा नीति पर विश्व बैंक की नीतियां हावी दिखती हैं.
शिक्षा व्यवस्था पर कॉरपोरेट घरानों का असर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. आज केंद्रीय शिक्षक हों या राज्य सरकार के, सभी का काडर तहस-नहस हो चुका है. नीतियां ऐसी हैं कि स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है. जो शिक्षक हैं, उनमें से ज्यादातर अप्रशिक्षित हैं. सरकार को इससे कोई मतलब नहीं कि ऐसे शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने में अक्षम हैं. सच्चाई यही है कि सरकार शिक्षकों की अहमियत समझना नहीं चाहती. वह बस कामचलाऊ रवैया अपनाए हुए है ताकि डिग्री बांटने का काम चलता रहे. अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए शिक्षण कार्य मिशन नहीं होता, इस बात से सरकार को कोई मतलब नहीं है. फिर सरकार उन्हें पर्याप्त वेतन भी नहीं देती. ऐसे में ये शिक्षक मजबूरन पढ़ाई पर अधिक ध्यान नहीं दे पाते.
दरअसल, सरकार नई शिक्षा नीति के जरिए ऐसी व्यवस्था करने पर आमादा है जिसमें शिक्षा और शिक्षक दोनों के लिए कम जगह हो और लोगों के प्रति भी उसकी कोई जवाबदेही न हो. सरकार अब परोक्ष नहीं बल्कि प्रत्यक्ष तौर पर यह चाहती है कि शिक्षा पर कॉरपोरेट हावी हों. इसके लिए वह लगातार नए-नए शिगूफे छोड़ रही है. सरकार अगर शिक्षा के प्रति वाकई गंभीर होती तो वह समान स्कूल प्रणाली और पड़ोसी स्कूल की अवधारणा पर काम करती, जिसकी अनुशंसा कोठारी कमीशन ने भी की थी. इसकी जगह वह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जैसी योजनाओं पर जोर दे रही है. इस योजना में सरकारी धन तो लग रहा है लेकिन लाभ निजी एजेंसियां कमा रही हैं. शिक्षकों को सरकारी फैसलों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए.
शिक्षक संगठनों ने प्रारंभ में ऐसा किया भी था लेकिन बाद में चुप्पी साध बैठे. इस समय शिक्षकों के सम्मान के लिए सबसे जरूरी यह है कि उनके काडर को बचाया जाए और शिक्षा के महती कार्य में बगैर किसी व्यवधान के उन्हें लगाया जाए. स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों के जितने खाली पद हैं, उन्हें भी अविलंब भरा जाना चाहिए. शिक्षक तभी सम्मानित रह पाएंगे जब शिक्षा पर सरकारी पकड़ बनी रहे. शिक्षा को बाजार के हवाले करने का अर्थ यही है कि शिक्षक भी बाजार के हवाले हैं. मैं समझता हूं कि शिक्षक जिन मूल्यों के संवाहक हैं, वह शिक्षा के बाजारीकरण के दौर में कभी भी सुरक्षित नहीं रह सकते.
पांच साल पहले मुंबई में आयोजित एक शैक्षिक सेमिनार में अंग्रेजी के एक राष्ट्रीय दैनिक के संपादक ने गर्व से बताया कि 1970 के दशक में कक्षा सात तक उन्होंने मुंबई महानगरपालिका के स्कूल में पढ़ाई की. जाहिर है, उनकी शिक्षा का माध्यम मराठी था. विडंबना देखिए कि उसी महानगरपालिका ने हाल में फैसला लिया है कि वह अपने 1200 प्राथमिक स्कूलों को कॉरपोरेट और एनजीओ को सौंपेगी. कारण बताया गया कि इन्हें गुणवत्ता के साथ चलाना महानगरपालिका के बस का नहीं है. मुंबई की यह सोच पूरे देश की सोच बन चुकी है.
पिछले साल कर्नाटक सरकार ने 3000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की घोषणा की. इसी सरकार ने कुछ साल पहले प्रदेश की शैक्षिक शोध और प्रशिक्षण परिषद को देश के एक ताकतवर कॉरपोरेट को सौंपने का फैसला ले लिया था. हालांकि लोगों के तीखे विरोध के कारण उसकी मंशा कामयाब नहीं हो पाई. सरकार की मंशा देश के 12 लाख सरकारी स्कूलों की व्यवस्था खत्म करने की है. इसकी जगह मनमाफिक फीस लेने वाले निजी स्कूल रह जाएंगे.
गौर करने वाली बात है कि 1991 में जब वैश्विक की नीतियों पर भारत के चलने की घोषणा हुई तो शिक्षा की बागडोर सरकार ने अपनी हाथों से छोड़ना तय किया. 1990 में भारत शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का चार प्रतिशत खर्च करता था, जो घटते-घटते आज 3.5 फीसद पर आ टिका है. कोठारी आयोग के अनुसार यह राशि छह प्रतिशत तय की गई थी. जाहिर है, जरूरत की तुलना में आधी से थोड़ी ही अधिक राशि खर्च की जा रही है. उच्च शिक्षा को तो और भी बिकाऊ माल बनाकर छोड़ा गया है.
आज सरकार के पास 500 से अधिक विश्वविद्यालयों और 25 हजार कॉलेजों की बेहतरी के लिए कोई ठोस योजना नहीं है. निजी विश्वविद्यालय फटाफट खुल रहे हैं और इनका एकमात्र ध्येय शिक्षा का व्यवसायीकरण कर पैसों का दोहन करना है. हम सुपर पॉवर होने की बात करते हैं लेकिन जा किस रास्ते पर रहे हैं? दुनिया की आबादी में हमारा हिस्सा सत्रह प्रतिशत है जबकि अमेरिका का केवल साढ़े चार प्रतिशत. जाहिर है, ऐसे में अगर हमारी शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त होती तो बेहतर मानव संसाधन हमारे पास होता और हम आगे निकल गए होते. शिक्षा का मकसद तो बेहतर समाज का निर्माण करना है जबकि सरकार वैश्विक बाजार और पूंजी के लिए पैदल सिपाहियों की फौज खड़ी करने में जुटी है.
शिक्षा का स्तर सुधरने का मतलब यह नहीं कि हमारे यहां स्नातकों की भीड़ हो जाए. हमारे पास स्नातक भले ही अमेरिका से अधिक हों, लेकिन हम फिर भी पिछड़ेंगे. कारण, वहां जो शोध होगा, वह हमसे काफी बेहतर होगा. इंजीनियरिंग और मेडिकल क्षेत्र में भी ऐसा ही हाल है. लोगों को डिग्रियों के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही. क्या हम सोचेंगे कि हम कैसा समाज बनाने जा रहे हैं?
हमारे संविधान का तकाजा यही है कि हर बच्चे को केजी से लेकर पीजी तक मुफ्त शिक्षा का बराबरी का अवसर मिले. इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि उन देशों ने ही शैक्षिक-बौद्धिक तरक्की हासिल की है जहां समान स्कूल व्यवस्था का ऐतिहासिक विकल्प अपनाया गया है. अमेरिका, रूस, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, जापान सब देशों पर यही बात लागू होती है. हाल में फिनलैंड ने इस व्यवस्था को अपनाया. तीन दशक पहले यह देश शिक्षा में यूरोप के देशों में सबसे नीचे था लेकिन नई राह पर चल कर इसने क्रांति ला दी. आज वहां एक भी निजी स्कूल और कॉलेज नहीं है और वहां की शिक्षा व्यवस्था बेहतरीन है. हम जैसे शिक्षक बना रहे हैं, हो सकता है, उनसे बेहतर वहां के छात्र हों. यह अतिशयोक्ति लग सकती है लेकिन हम इसी राह पर हैं. क्या हम अपनी राह बदलेंगे?
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उत्तराखंड त्रासदी विकास के मॉडल को चुनौती है


उत्तराखंड त्रासदी वर्तमान विकास के ऊपर एक प्रश्न चिन्ह है और हमारे विकास के मॉडल को चुनौती है

त्रासदी को हमशब्दों में बयां नहीं कर सकते जिन्होंने अपने जन धन खोएं हैं उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती,

हम आभारी है उन सभी लोगों के जिन लोगों ने इस बीभत्स परिस्थिति में कंधे से कन्धा मिलाकर लोगो को बचाने में अपना योगदान दिया । सलाम है उन जवानों को जिन्होंने जान गंवाकर के भी अपने लोगों को बचाने में कोई कसर न छोड़ी  हम उनके साहसिक प्रयासों को तहे दिल से सलाम करते  हैं । ईश्वर इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों को इसे सहने की शक्ति दे। दुख की इस घड़ी  में  समूचा भारतवर्ष  उनके साथ है ।

विकास ऐसा होना चाहिए जो प्रकृति के नियमानुकूल हो,  ना कि प्रकृति को अपने सुविधा अनुसार केवल और केवल दोहन और उसके बाद उसको उसी हाल पे छोड़ देना, ऐसा करना ही ऐसे त्रासदी को निमंत्रण देते हैं

कुदरत के साथ बदसलूकी इतनी महंगी पड़ेगी इसका अंदाजा शायद किसी को नहीं था।  हम में से बहुत से लोगों ने अत्यंत ही नजदीक से पर्वतीय क्षेत्रो में कुदरत द्वारा स्थापित पेड़, जंगल, घाटियाँ आदि देखी है या देखी होंगी।  जिस प्रकार से संसाधनों का दोहन हो रहा है, दिन प्रति दिन पर्वतो और पेड़ों की कटाई और होटल का निर्माण, पानी को रोकना और जगह जगह नदियों के पानी को रोक कर के बांधो का निर्माण अपने आप में एक बहुत बड़ा कारण है ।

जिसको हमने विकास का नाम दिया है शायद वास्तविक रूप से अगर देखा जाये तो वो प्रकृति  के विनाश  का ही रूपांतरण है । जिस स्थान पर पर्वत श्रिंखला दिखती थी । उन जगहों पर हाईवे बना दिया नतीजन जो पर्वत और पेड़ पहाड़ो को बांधे रखने का काम करते थे वो सारे अलग थलग पड़ गए । पेड़ की लगातार कटाई पर्वतों को नंगा करता गया और  ऊपर से आने वाले पानी के धार में रूकावट ना होने के कारण जलधारा का वेग बढ़ा और बढ़ी हुई पानी की मात्रा  ने बाढ़ का रूप ले लिया । पहले ढलान पर किसान वेदिका बना कर के खेती का काम करते थे । आज वेदिका के स्थान पर होटल दुकान और क्या क्या बन गए जिस से पानी की धारा को रोकना असंभव हुआ  और नहीं तो हमने नदी के रास्ते को सड़क बना दिया अर्थात यह कहे की मनुष्य ने प्रकृति प्रदत चीजों का अतिक्रमण कर लिया और अतिक्रमण किसी भी रूप में हो प्रकृति को स्वीकार्य नहीं है । हमने अभी हाल में ये समाचार देखा कि उत्तराखण्ड में ढेर सारे पॉवर प्रोजेक्ट चल रहे हैं या मूर्त रूप लेने वाले हैं । इतनी कुर्बानी  देकर ये विकाश का तांडव न्य्यायोचित नहीं है 

समस्त मानव समुदाय के लिए यह एक सबक है की कुदरत के अनुरूप ही कार्य करें, जहाँ पर कुदरत की बनाई व्यवस्था  में अपने सुविधा अनुसार फेरबदल की कोशिश होगी तो स्वाभाविक है उसके दुस्परिणाम भी होंगे ।

जिस स्थान को हम देव भूमि कहते हैं आजकल उन स्थानों को लगभग पर्यटन स्थान के रूप में चिन्हित करा दिया गया है , जिसका नतीजा मात्र २ वर्षों में गाड़ियों की संख्या दोगुनी हो जाती है और देवभूमि जगहों पर स्रधालु कम पर्यटकों की भीड़ ऐसी हो जा रही है जिसके कारण स्वाभाविक संतुलन असंतुलित होता  जा रहा है । यह विषय विचार और चिंतन का है जिसको हमें समझाने और समझने की ज़रूरत है ।

लेखिका सांवरी वोमेन पॉवर क्लब की संस्थापिका हैं

 

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सांवरी वोमेन पॉवर क्लब द्वारा स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन तथा पीतमपुरा शाखा का सुभारंभ


 पीतमपुरा, दिनांक 24 फ़रवरी को प्रातः काल 9 बजे से अग्रसेन भवन , सांवरी क्लब की नूतन शाखा के सुभारम्भ के सुभ अवसर पर  चिकित्सा जाँच शिविर तथा भारतीय महिला पुरस्कार” इंडियन वोमेन अवार्ड ” नामक समारोह  का आयोजन किया गया ।  शिविर में सांवरी वोमेन क्लब  की  संस्थापिका  श्रीमती सीमा गोयल  जी का विशेष योगदान रहा । सांवरी क्लब का यह प्रयास नारी समाज के उत्थान के लिए किया गया एक प्रयाश है तथा सांवरी प्रबन्धन यह आशा करती है कि आने वाले समय में हमारे किये प्रयाश हर जरूरतमंद महिला को मिले , इन्ही सामाजिक पहलुवों को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने पीतमपुरा में एक शाखा खोली है । 

इस विशेष अवसर पर समाज की अनेक महिलाओं को जिन्होंने भिन्न – भिन्न विषय क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए समाज व  महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य किये हैं, उन्हें इंडियन वीमेन अवार्ड से सम्मानीत किया गया,इस सुभ अवसर पर श्रीमती आरती गर्ग, श्रीमती  पूनम गुप्ता  तथा श्रीमती सीमा  गोयल के नेतृत्व में  सांवरी वोमेन पॉवर क्लब की पीतमपुरा शाखा का सुभारंभ भी हुआ ।
 
 स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ नारी का होना आवश्यक है। इन विषयों पर ध्यान आकर्षण करते हुए संस्थापिका महोदया ने मुख्य अतिथि श्रीमती व श्रीमान अनिल भारद्वाज [विधायक दिल्ली प्रदेश, संसदीय सचिव दिल्ली सरकार ], श्रीमती आभा चौधरी [ प्रेजिडेंट दिल्ली महिला प्रदेश कांग्रेस ], श्रीमती गीता यादव निगम पार्षद, जी का स्वागत किया ।
 
श्रीमती सीमा गोयल जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य शिविर में मशहूर चिकित्सका गीता मेहंदीरत्ता [ प्रसूति रोग  सर गंगा राम हॉस्पिटल ] व आयुर्वेद आचर्य पारुल गुप्ता [ मृतुन्जय सेंटर फॉर ओबेसिटी ] ने महिलाओं  को स्वास्थ्य जागरूकता तथा नारी स्वास्थ्य के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला ।
महिलाओं के साथ साथ सांवरी वोमेन पॉवर क्लब के सौजन्य से बच्चो ने स्वास्थ्य शिविर का भी लाभ लिया । वासन ऑय केयर के सौजन्य से महिलाओं तथा बच्चो के आँखों की जाँच करवाई तथा थाईरोकेयर का भी शिविर में विशेष सहयोग रहा । 
 
 सांवरी क्लब की मुख्य संरक्षिका श्रीमती पूनम गुप्ता ने शिविर में आये सभी लोगों का आभार व्यक्त किया तथा इतनी बड़ी उपस्थिति  को देखकर उन्होंने सम्पूर्ण नारी ससक्तिकरण के अपने विचार को आगुन्तको के समक्ष  पुनः स्मरण कराया और कहा कि यही हमारे आयोजन की सार्थकता है ।
 
 श्रीमती  गोयल ने उपस्थित सभी महिलाओं के साथ साथ वासन आई केयर थाइरोकेयर सरोज हॉस्पिटल टीम, डॉक्टर गीता मेहंदीरत्ता, सर गंगाराम हॉस्पिटल  व  डॉक्टर पारुल गुप्ता मृतुन्जय सेंटर फॉर ओबेसिटी से मिले सहयोग के लिए सांवरी प्रबंधन तथा परिवार के तरफ से  आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मंच नारी  समाज को मौका और सुविधायें देता है जो उनके अंदर समाहित क्षमता को समाज के सम्मुख लाने में मदद करता है । तथा प्रत्येक दृश्य में महिलाओं को प्रोत्साहित करना ससक्त बनाना ही लक्ष्य है ।
 
श्रीमती गोयल ने कहा कि बहनों जीवन एक खेल है और इसे ख़ूबसूरती के साथ खेलना होगा बिना जीत हार का ध्यान किये क्योंकि जीत जीवन का नाम नहीं है।जीवन में जीत और चुनौतिया दोनों उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने दिन और रात। अगर रात होगी नहीं तो दिन का अनुमान कैसे होगा। चुनौतियों से भागना पलायन है।  उसके साथ में रहकर आप चुनौतियों का सामना बखूबी कर सकती हैं।  हमे अपने सोच से बाहर आना होगा  सती प्रथा, बाल विवाह  भी एक नारीगत सामाजिक चुनौती थी । लेकिन हमने हटाया इसी तरह कोई भी ऐसी बात हमारे बीच में है जो नारी सम्मान के लिए अहितकर है, तो समाज को आगे आकर इसको हटाना होगा परन्तु सबकी सहमती से किया गया कार्य सराहनीय और दीर्घकालिक होगा क्योंकि इसमें सबकी जिमेदारी होती है सरकार, समाज, कानून की। अगर हम सभी संगठित होकर रहे तो नारी समाज में जाग्रति के साथ -साथ महिला ससक्तिकरण के कार्य रूपी लक्ष्य को हम अवस्य ही पूरा कर लेंगे। 
 
जय हिन्द जय शक्ति 
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Event Sanwari Women Power Club Event at Pitampura


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Past Event for Pics PromotionAmrit India Press Release432Sanwari club  Press Release - -Swabhiman Times

The Sanwari Pitampura Branch Inauguration Event was a full day function with the first half being the health Camp for women & the latter part is of recognizing & rewarding the Sanwari Members for their outstanding contribution to the concept of women empowerment.

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Women’s Health is Society Wealth’s


Standing tall for the cause of Women Empowerment is what Sanwari Women Power Club does in its forthcoming event on 24th Feb’13. The significance of women is getting more prominent in the current times not only as the home makers but also the bread earners. Thanks to the more number of women coming to the forefront in almost all areas. There are many leadership roles welcoming women to shoulder the responsibility of building a better society and on the same lines, the challenges that women face are also getting complex specially in the domain of social security, physical health, over all well being, managing professional & family expectations etc.

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Women’s Health is Society’s Wealth

Here stands Our , encouraging & moulding women in coming out with the best potential. Sanwari Women Power Club organizes from time to time many life empowering services to its members along with social building activities.

Sanwari Women Power Club has grown from a humble beginning to the current phase of opening branches.This event on 24th feb’13 is about the launch of Pitampura Branch. There will a free medical counseling camp being organized by big names in the medical fraternity. many famous lady doctors will give guidance to members of Sanwari Women Power Club on maintaining good health, young looks, beauty, obesity,& others.

Sanwari Women Power Club is marching  forward to be a torch bearer for women empowerment in the society and is happy about its membership base  touching a new land mark every month..

Sanwari Women Power Club which is being run under the able leadership of Mrs.Seema Goel plans to open up several branches in the coming times covering all areas & locations in Delhi.

Event Location :  Agraasen Bhwan, Near Ashiyana Chowk, Pitampura, Delhi 110034
Chief Guest : MRs & Mr. Anil Bhardwaj [MLA]
Time Details : Medical Checkup –  9AM – 12AM
Award and Recognition – 12 AM Onwards

Doctor Details:

Doctor Geeta Mediratta,  MD Obst . Gyne [Sir Ganga Ram Hospital ]
Doctor Parul Gupta  Ayurveda Acharya  [Mirtunjay Centre for Obesity ]

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